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छत्तीसगढ़ :बर्तन खरीदी घोटाला मुख्य सचिव को जांच के निर्देश…पढ़िये क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ प्रदेश रायपुर

रायपुर।।बर्तन खरीदी घोटाला मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक पहुंच चुका है. बड़े पैमाने पर हुए इस भ्रष्टाचार की शिकायत पीएमओ से की गई थी. पीएमओ ने शिकायत को संज्ञान में लिया है. उसके बाद छग के मुख्य सचिव अमिताभ जैन को पत्र भेजकर जांच के निर्देश दिए हैं.

बर्तन घोटाले का खुलासा

छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिस्टोफर पॉल ने जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत किया था. इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की गई. शिकायकर्ता क्रिष्टोफर पाल ने अपनी शिकायत में कहा कि भ्रष्टाचार की पुष्टि होने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं की गई है.

शिकायतकर्ता ने क्या कहा ?

एसोसिएशन ने कलेक्टर राजनांदगांव से मिलकर इसकी जांच कर जिला शिक्षा अधिकारी के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की थी. लेकिन कलेक्टर ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया. तब इसकी लिखित शिकायत प्रधानमंत्री से सीधे किया गया. अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव अमिताभ जैन को इस मामले की जांच कर जांच रिर्पोट पीजीपीएमओ पोर्टल में अपलोड करने का निर्देश दिया है.

ये है पूरा मामला

बता दें कि राजनांदगांव जिले में 1491 सरकारी शालाओं में मध्यान भोजन मनाने के लिए किचन डिवाइस खरीदी किया जाना था. जिसके लिए कुल 74.55 लाख की राशि स्वीकृत किया गया था. जिसमें प्रत्येक शाला को 5000 रूपए की किचन डिवाईस क्रय किया जाना था. जिसमें प्रेशर कुकर, कढ़ाई, तगाड़ी, जग और भगोना आदि क्रय किया जाना था. खरीदी में छग भंडार नियम का कड़ाई से पालन किया जाना है. यानि खरीदी करने से पूर्व क्रय समिति को गठन और स्कूलों से मांग पत्र भी लिया जाना था. क्योंकि स्कूलों में दर्ज संख्या के आधार पर किचन डिवाइस खरीदने का प्रावधान है. लेकिन राजनांदगांव में इन नियमों को ताक में रखकर खरीदी और वितरण कर दिया गया.

जब इस मामले की लगातार शिकायत हुई, तो राजनांदगांव जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच कराया. जांच रिपोर्ट के अनुसार मध्यान भोजन के लिए जो बर्तन खरीदी किया गया था वह बेहद घटिया क्वालिटी और कम वजन के थे. इस कम वजन वाले बर्तनों को वापस किया जाना था. लेकिन 18 फरवरी को डीईओ इसी घटिया क्वालिटी के बर्तन जो कम वजन के थे वितरण करने का फरमान जारी कर दिया. सप्लाई करने वाली कंपनी क्रिस्टल इंडिया इंडस्ट्रीस को लाखों रूपए का भुगतान भी कर दिया गया.

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