छत्तीसगढ़ सरकार पर 70 हजार करोड़ का कर्ज, किसानों के लिए और कर्ज लेने की तैयारी

छत्तीसगढ़ प्रदेश

छत्तीसगढ़।। सरकार का वित्तीय संकट कम होता नहीं दिख रहा है। इससे निपटने के लिए सरकार नया कर्ज लेने की तैयारी कर रही है। सरकार पर पहले से ही 70 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। प्रदेश के कृषि, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे ने आज कहा, यह तो प्रदेश की वित्तीय स्थिति है। केंद्र सरकार ने हमारा 21 हजार करोड़ रुपए नहीं दिया और किसानों के धान का पैसा हमको देना है तो कहीं से तो इंतजाम करना पड़ेगा। रविंद्र चौबे ने कहा, इसी महीने में हमें राजीव गांधी किसान न्याय योजना की चौथी किश्त का पैसा भी देना है। उसकी तारीख तय है। मुख्यमंत्री जब असम के दौरे से लौटेंगे तो किसानों के खाते में चौथी किश्त जारी की जाएगी। उन्होंने कहा, इन सब कामों के लिए पैसे की आवश्यकता पड़ेगी तो हो सकता है कि हमें कर्ज लेना पड़े।

राज्य सरकार ने इस साल जनवरी महीने में ही 2759 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। इसको मिलाकर सरकार पर कुल कर्ज 70 हजार करोड़ रुपए से अधिक का हो गया है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया था, दिसम्बर 2018 में जब कांग्रेस की सरकार ने सत्ता संभाला था। तब सरकार पर 41 हजार 239 करोड़ का कर्ज था। बीते दो वर्षों में इसमें 36 हजार 170 करोड़ रुपये का नया कर्ज जुड़ गया। इस रकम के प्रबंधन के लिए पिछली बार 5996 करोड़ कर्ज का ब्याज भरने के लिए और 4841 करोड़ रुपए मूलधन की रकम अदा करने के लिए बजटीय व्यवस्था करनी पड़ी थी।

केंद्र सरकार को बताया जिम्मेदार

ऐसी स्थिति बनने के लिए राज्य सरकार केंद्र को जिम्मेदार ठहरा रही है। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा, केंद्र सरकार ने प्रदेश का 21 हजार करोड़ रुपए अपने पास रोक रखा है। यह रकम समय से मिलती तो कर्ज लेने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार की मानसिकता ही छत्तीसगढ़ को पैसे देने से रोकने का है।

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