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राजनीति: धान और किसान पर छत्तीसगढ़ में राजनीति अनलिमिटेड

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रायपुर।। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के बाद चावल को खपाना एक चुनौती बन गया है. छत्तीसगढ़ सरकार अतिरिक्त धान की नीलामी करने की तैयारी में है. खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने साफ कर दिया है कि केंद्र सरकार अगर सेंट्रल पूल से चावल खरीदी नहीं करती है, तो अतिरिक्त धान की नीलामी की जाएगी. इस बयान के बाद छत्तीसगढ़ में सियासत तेज हो चुकी है. बीजेपी-कांग्रेस पर लगातार हमलावर है. पूर्व कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि नीलामी का फैसला सरकार के अनप्रोफेशनल रवैया को दर्शाता है. कांग्रेस सरकार बड़े-बड़े वादे के बाद अब यह हालत है कि धान की नीलामी करने जा रही है

छत्तीसगढ़ में खाद्यान योजनाओं के लिए 25 लाख मीट्रिक टन धान स्टोर कर लिया गया है. केंद्रीय पूल में 40 लाख मीट्रिक टन चावल खरीदी को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक 24 लाख मीट्रिक टन चावल PDS गोदाम में रखने की अनुमति दी है. सरकार के पास अब तकरीबन 20 लाख मीट्रिक टन धान ज्यादा है. खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि केंद्र सरकार चावल खरीदी का कोटा नहीं बढ़ाएगी, तो राज्य सरकार धान को खुले बाजार में बेच देगी. सरकार अतिरिक्त धान की नीलामी की तैयारी कर रही है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने वादा निभाया पर केंद्र नहीं कर रही सहयोग

खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के किसानों से अपना वादा निभाया है. छत्तीसगढ़ बनने से अब तक सबसे बड़े पैमाने पर धान की खरीदी की गई है. सरकार ने 92 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का रिकॉर्ड बनाया है. बावजूद इसके केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ से सौतेला व्यवहार कर रही है. केंद्र सरकार ने सिर्फ 24 लाख मीट्रिक टन चावल को लेकर सहमति दी है. इससे भूपेश सरकार के पास 20 लाख 39 हजार मीट्रिक टन धान ज्यादा बच गया है. सभी धान की सरकार नीलामी करेगी

धान की नीलामी को लेकर सरकार पर बिफरा विपक्ष

धान की नीलामी के फैसले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर जमकर हमला बोला है. कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि धान की नीलामी का फैसला नाकामी को दर्शाता है. जब सरकार आर्थिक रूप से कमजोर होती है, तब इस तरह से फैसले लिए जाते हैं. यही नहीं उन्होंने कहा कि बड़ा सवाल तो यह है कि खरीदेगा कौन?. बाजार में इससे काफी कम कीमत पर धान मिल रहा है.

सरकारी नाकामी को छुपाने के लिए ले रही फैसला

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि बाजार में पहले से ही 15 रुपये में धान मिल रहा है. ऐसे में 22 रुपये का दाम सरकार को कहां मिल पाएगा ?. सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के लिए उलूल-जुलूल फैसले ले रही है. यह सरकार की कथनी और करनी को दर्शाने के लिए काफी है.

नीलामी को लेकर भी सरकार ने किया खाका तैयार

नीलामी की प्रक्रिया के लिए तैयारी की जा चुकी है. बीडर पंजीयन 18 तारीख से शुरू किया जाएगा. नीलामी एमएसपी के दर पर की जाएगी. प्राइवेट सोसायटी में धान पड़े रहने से सरकार को भी बड़ा नुकसान हो रहा है. धान भी खराब हो रहा है.

पुराने बारदाने में चावल लेने की अनुमति मांगी

खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि सरकार ने मोदी सरकार से FCI में पुराने बारदाने में चावल रखने की अनुमति देने की अपील की है, लेकिन केंद्र सरकार से कोई जवाब नहीं आया है. खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने बारदाने के लिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर अनुरोध किया था, जिसके बाद केंद्र सरकार ने 1.48 लाख बारदानों की स्वीकृति दी थी. इसके बाद भी 1.08 लाख बारदानों की कमी रही. FCI ने पुराने बारदानों के उपयोग से इनकार किया है. ऐसे में राज्य सरकार की परेशानी बढ़ गई है

एक नजर में धान और चावल की खरीदी

छत्तीसगढ़ में इस साल 92 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है. इसमें से राज्य की योजनाओं के लिए करीब 25 लाख मीट्रिक टन चावल की खपत होती है. केंद्रीय पूल में भारत सरकार ने करीब 40 लाख मीट्रिक टन लेने की सहमति दी है. राज्य की मांग पर अगर केंद्र 20 लाख मीट्रिक टन और धान नहीं लिया तो यह धान खरीदी केंद्रों और गोदामों में सड़ जाएगा. यही वजह है कि सरकार ने पहली बार धान के नीलामी का फैसला लिया है.