Cg Breaking झाड़-फूंक के बजाय डॉक्टर द्वारा इलाज पर रखें विश्वास : कलेक्टर… यहां का है पूरा मामल

विगत दिवसों में जिले के ग्राम रंगईगुड़ा और मारोकी में अज्ञात बिमारी से ग्रामीणों की मृत्यु के प्रकरण से अवगत होने के तत्काल बाद से ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा मृत्यु के असल कारणों की जांच की गई। जिसमें पाया गया है कि अधिकतर ग्रामीणों द्वारा चिकित्सकों से इलाज के बजाय गांव के ही बैगा (बड्डे) द्वारा झाड़-फूंक करवाया जा रहा था। जबकि मितानिनों, स्वास्थ्य अमले के द्वारा उन्हें बार बार नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर जांच हेतु ले जाने का प्रयास किया गया, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया।

इन प्रकरणों के बाद से कलेक्टर हरिस एस. के निर्देशानुसार रंगईगुड़ा औा मारोकी में स्थानीय रुप से मेडिकल जांच शिविर लगाया जा रहा है, ताकि समान लक्षण वाले ग्रामीणों को समय पर चिन्हांकन कर उन्हें स्वास्थ्य लाभ दिया जाए। वहीं गंभीर लक्षण वाले ग्रामीणों को बेहतर इलाज हेतु जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है।जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ यशवंत ध्रुव ने बताया कि रंगईगुड़ा में विगत दो दिनों से स्वास्थ्य शिविर लगाकर ग्रामीणों की जांच की जा रही है।

अब तक कुल 63 ग्रामीणों की सामान्य जांच के साथ ही एनीमिया, टीबी, रक्तचाप, मधुमेह, मलेरिया की जांच की गई है। साथ ही गंभीर लक्षण वाले 7 ग्रामीणों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। जिसमें एक टीबी, एक निमोनिया, एक घुटने में दर्द, एक चेहरे पर सूजन, एक पैर में सूजन और दो मरीजों को पेट दर्द की शिकायत है।प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम रंगईगुड़ा में हुई मृत्यु में दो ग्रामीणोें की उम्र 70 वर्ष से अधिक थी और दोनों की प्राकृतिक मृत्यु हुई है। वहीं दो ग्रामीण जिनकी आयु 24 एवं 34 वर्ष थी, उन्हेें पेट एवं शरीर की सूजन की समस्या थी, जो गांव में ही बैगा(बड्डे) से झाड़-फूंक करवा रहे थे, इलाज हेतु अस्पताल नहीं गए। वहीं ग्राम मारोकी में बीते 15 दिनों में कुल 8 ग्रामीणों की मृत्यु होना पाया गया है।

जिसमें दो की मृत्यु बिजली करंट लगने से हुई है।एक ग्रामीण की वृद्धावस्था के फलस्वरूप प्राकृतिक मृत्यु होना पाया गया है। वहीं दो ग्रामीणों की मृत्यु पेट एवं हाथ पैर में सूजन के कारण होना बताया गया है, जो बड्डे से झाड़-फूंक करवा रहे थे। एक ग्रामीण की मृत्यु सीने में दर्द के कारण हुई है और दो ग्रामीणों की मृत्यु पुरानी बिमारी के चलते हुई,जिसमें से एक 54 वर्षीय महिला का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा था। यहां यह उल्लेखनीय है कि अधिकतर ग्रामीणों के द्वारा बैगा बड्डे के झाड़-फूंक से रोग का निदान किया जा रहा था। जबकि ग्रामीणों को मितानिन की सहायता लेते हुए नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र का रुख करना चाहिए था। जिससे समय पर उनका इलाज संभव हो पाता।

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