CG ब्रेकिंग – आधा शिक्षा सत्र निकल गया लेकिन बच्चों नहीं मिला सोया-चिक्की, अधिकारीयों ने 6 महीने से लटका रखा है फाइल…

रायपुर – छत्तीसगढ़ में अधिकारीयों की सुस्ती के कारण स्कूली बच्चों के बनाए गए बड़ा प्रोजेक्ट लटक गया, स्कूली बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने सोया चिक्की खिलाने की योजना बनाई है। इसके लिए पहले चरण में राज्य सरकार को सात जिले के आठ लाख बच्चों के लिए 29 करोड़ देने का बजट स्वीकृत किया गया है, परंतु स्कूल शिक्षा के अधिकारियों ने इसकी फाइल को ही रोक दिया है। इससे बच्चे यह पौष्टिक चिक्की खाने से वंचित रह जा रहे हैं। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस योजना को यदि सफलता मिलती तो राज्य के 30 लाख बच्चों के लिए यह लागू की जाती।

आपको बता दें प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने पहले चरण में प्रदेश के सात जिलों दुर्ग, गरियाबंद, कोरिया, सूरजपुर, रायगढ़, बलौदाबाजार और बलरामपुर के विद्यार्थियों को भोजन के साथ प्रोटीनयुक्त सोया चिक्की देने की योजना को स्वीकृति दी है। इसके तहत सप्ताह में दो बार सोया चिक्की दी जानी है। प्राइमरी के बच्चे को एक बार में 30 ग्राम औरमिडिल स्कूल के बच्चों को 60 ग्राम सोया चिक्की खिलाना है। बता दें कि प्रदेश में कुपोषण का स्तर अभी भी 32.4 प्रतिशत है।

6 महीने से अटकी है फाइल

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने पीएबी (प्रोग्राम अप्रूवल बोर्ड) की बैठक में 17 मई 2022 को इस योजना को स्वीकृत किया था। नियमत: शिक्षा सत्र शुरू होते ही जून से इस योजना का लाभ बच्चों को मिल जाना था। आधा सत्र बीतने को है और स्कूल शिक्षा विभाग ने अब तक इसकी प्रशासकीय स्वीकृति तक नहीं दी है, जबकि लोक शिक्षण संचालनालय ने मई में ही सचिवालय को प्रशासकीय स्वीकृति के लिए पत्र भेज दिया था। चिक्की खिलाने के लिए केंद्रांश के तौर पर 18 करोड़ फ्लेक्सी मद से खर्च होने हैं, जबकि राज्यांश के 11 करोड़ अभी तक नहीं मिले हैं। जानकारी के अनुसार केंद्रीय योजनाओं के लिए प्रदेश को 225 करोड़ रुपये पहले चरण में मिल चुके हैं। इनमें फ्लेक्सी मद में भी 30 करोड़ जारी हुए हैं। इसी मद से पौष्टिक आहार देने की तैयारी है

प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना में है इतना बजट

योजना के तहत कुकिंग कास्ट के रूप में दाल, सब्जी, नमक, मसाला, तेल, ईंधन आदि के लिए राशि दी जाती है। प्राइमरी स्कूलों को इस मद में केंद्रांश और राज्यांश मिलाकर प्रति विद्यार्थी 5.39 रुपये दिए जाते थे। अब राशि में वृद्धि होने से प्रति विद्यार्थी 5.69 रुपये मिलेंगे। इसी प्रकार मिडिल स्कूलों को प्रति विद्यार्थी 7.75 रुपये मिलते थे। अब प्रति विद्यार्थी 8.17 रुपये मिलेंगे। इस तरह कुल 29 लाख विद्यार्थियों के लिए 400 करोड़ रुपये केंद्राश और 200 करोड़ रुपये राज्यांश से मिलता है।

पहले सोया मिल्क में भी हुई थी लापरवाही

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में भी केंद्र ने सोया मिल्क देने का बजट दिया था। उस समय भी राज्य ने यह कहकर फाइल रोक दी थी कि सोया मिल्क को रखने की जगह नहीं है। इसे पिलाने से बच्चों के बीमार होने की आशका बनी रहती है। अब सोया चिक्की भी लापरवाही की भेंट चढ़ती दिख रही है।

छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने कहा, सोया चिक्की की फाइल नहीं रोकी है। सोया चिक्की के साथ-साथ बच्चों को रागी और छोटे-छोटे अन्य प्रोटीनयुक्त छोटा बाजरा (माइनर मिलेट्स) देने के लिए प्रस्ताव बना रहे हैं। इसे केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को स्वीकृति के लिए भेजेंगे।

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