छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बढ़ावा देने राज्य स्तरीय युवा उत्सव की शुरुआत, कलाकारों के लिए सुनहरा अवसर.. देंखे समयसीमा

रायपुर। Culture of Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के युवाओं को प्रदेश की सांस्कृतिक गतिधियों से जोड़ने सरकार अब राज्य स्तरीय उत्सव कराने जा रही है। चार स्तरों पर होने वाली स्पर्धा की शुरुआत 15 नवम्बर तक विकासखंड स्तर पर होगी।

इस उत्सव का उद्देश्य राज्य के युवाओं को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने एवं उनकी प्रतिभा को निखारना है। यह आयोजन विकासखण्ड, जिला, संभाग और राज्य स्तर पर किया जाएगा। विकासखण्ड युवा उत्सव का आयोजन 15 नवंबर तक चलेगा। इसके बाद जिला स्तरीय युवा उत्सव का 16 नवंबर से 10 दिसंबर तक, संभाग स्तरीय युवा उत्सव 11 से 31 दिसंबर तक और राज्य स्तरीय युवा उत्सव का आयोजन 12 से 14 जनवरी तक किया जाएगा। इस उत्सव को दो आयु वर्ग में बांटा गया है। पहला 15 से 40 वर्ष आयु तक और दूसरा 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में होगा।

इस उत्सव का आयोजन प्रदेश सरकार के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने दिशा-निर्देशों जारी कर दिया है। युवा वर्ग में 18 विधाओं में प्रतियोगिताएं होंगी। इन विधाओं में लोकनृत्य, लोकगीत, एकांकी नाटक (हिन्दी, अंग्रेजी भाषा, छत्तीसगढ़ी), शास्त्रीय गायन हिन्दुस्तानी शैली, शास्त्रीय गायन कर्नाटक शैली, सितार वादन (शास्त्रीय वादन), बांसुरी वादन (शास्त्रीय वादन), तबला वादन (शास्त्रीय वादन), वीणा वादन (शास्त्रीय वादन), मृदगंम वादन(शास्त्रीय वादन), हारमोनियम वादन (सुगम वादन), गिटार वादन (भारतीय एवं पाश्चात्य संगीत), मणीपुरी (शास्त्रीय नृत्य), ओडिसी (शास्त्रीय नृत्य), भरतनाट्यम (शास्त्रीय नृत्य), कत्थक (शास्त्रीय नृत्य), कुचीपुड़ी (शास्त्रीय नृत्य), वक्तृत्व कला (शास्त्रीय नृत्य) को शामिल किया गया हैं

पारंपरिक एवं अन्य गतिविधियां भी शामिल

इन विधाओं के अतिरिक्त पारंपरिक एवं अन्य गतिविधियों का भी आयोजन शामिल है। इनमें सुआ, पंथी, करमा नाचा, सरहुल नाचा, बस्तरिहा लोकनृत्य, राउत नाचा, फुगड़ी, भौंरा, गेड़ी दौड़, रॉक बैंड (सीधे राज्य स्तर पर सम्मिलित किया जाएगा), पारंपरिक वेशभूषा (विविध वेशभूषा) प्रतियोगिता, फूड फेस्टिवल-छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के आधार पर प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता-छत्तीसगढ़ के लोक संस्कृति के चित्रण के आधार पर, कबड्डी, खो-खो, कुश्ती, मुख्यमंत्री भूपेश द्वारा की गई घोषणानुसार राज्य के लोक साहित्य को भी शामिल किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य विविध संस्कृति एवं विविध बोलियों वाला प्रदेश है, अतः जिला स्तर पर स्थानीय लोक कला (जैसे-पेंटिंग, हैण्डीक्राप्ट, भित्तीचित्र एवं अन्य), लोक भाषा का साहित्य जैसे गोंडी, हल्बी, कुडूक आदि एवं अन्य सभी लोक भाषा के जो भी लोक कलाकार प्रस्तुति देना चाहें, यदि वे छत्तीसगढ़ की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हों, उन सभी को जिला स्तर पर शामिल किया जाएगा। बौद्धिक श्रेणी में वाद-विवाद तात्कालिक एवं समसमायिक विषयक, क्विज, निबंध प्रतियोगिताएं भी होंगी।

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