किसने और क्यों लिया था दुनिया का पहला चुम्बन, फ्रेंच Kiss से लेकर पाबंदी तक का लंबा है इतिहास…

वक्त के साथ चुंबन का रूप गहराता गया. ये ज्यादा इंटेन्स हो गया. खासकर होठों पर चुंबन प्यार का प्रतीक बन गया. हालांकि फिलहाल Kiss के जिस रूप पर फ्रांस अपना ठप्पा लगाता है, उसकी शुरुआत किसी फ्रांसीसी जोड़े से हुए होगी, इसपर काफी लट्ठम-लट्ठ हो चुकी. जानकार ये भी कहते हैं कि चुंबन भारत से शुरू हुआ और आक्रमणकारियों से होता हुआ दुनिया में फैला.

कांग्रेसी नेता राहुल गांधी इधर भारत जोड़ो यात्रा पर हैं. फिलहाल राजस्थान में चल रहे सफर के दौरान उन्होंने बीजेपी ऑफिस से गुजरते हुए कार्यकर्ताओं की तरफ हवा में चुंबन उछाला. बात खूब चर्चा में रही. खैर ! फिलहाल हमारा मकसद पॉलिटिक्स नहीं, बल्कि kiss की पॉलिटिक्स है. आमतौर पर रोमांस या स्नेह से जोड़े जाते चुंबन की शुरुआत बेहद दिलचस्प है. वहीं बीच में ऐसा भी दौर आया, जब कई सरकारों ने इसपर बैन लगा दिया।

मसला जितना दिलचस्प हो, उसपर बातें भी उतने ही तरह की होंगी, किस के साथ भी कुछ ऐसा ही है. एंथ्रोपोलॉजिस्ट अलग-अलग थ्योरी देते हैं कि चुंबन की शुरुआत कैसे और कहां से हुई होगी. हां, एक बात लगभग सभी कहते हैं कि पहला किस एक हादसा रहा होगा. हादसा, जो पसंद आ गया।

शुरुआत मां के बच्चों को खाना खिलाने से हुई होगी. पहले पशु भी खाने का निवाला या अनाज-फल सीधे बच्चों के मुंह में नहीं डालते थे, बल्कि चबाया हुआ कौर मुंह से मुंह में दिया जाता. इसे प्रीमेस्टिकेशन फूड ट्रांसफर कहते हैं. ह्यूमन इवॉल्यूशन इसी तरह से हुआ होगा. चिंपाजियों में अब भी ऐसा होता है. और चिंपाजी मांएं अपने बच्चों को दुलारते हुए किस भी करती हैं. तो ये भी हो सकता है कि हमने अपने पूर्वजों की देखादेखी चंबन का लेनदेन सीख लिया हो।

दूसरी थ्योरी भी है, जिसके मुताबिक चुंबन एक एक्सिडेंट की देन है. टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजी विभाग ने इसपर भारी स्टडी की और क्लेम किया कि सूंघते हुए हमने एकाएक एक-दूसरे को चूम लिया होगा. यहीं से हुई शुरुआत. बात में थोड़ा दम इसलिए भी है कि पुराने समय में एक-दूसरे को मिलते हुए सूंघने का चलन था. बहुत सी सोसायटी में सूंघना ही एक तरह का अभिवादन था. सूंघते हुए ही एकाएक किसी जोड़े ने चुंबन ले लिया होगा. ये नई चीज है. शायद ज्यादा लुभावनी और ज्यादा करीबी लगने वाली।

माना जाता है कि चुंबन की शुरुआत इसी तरह से और वो भी हमारे ही देश से हुई. बाद में प्राचीन ग्रीक भारत आए और लौटते हुए चुंबन का कंसेप्ट भी साथ ले गए. इसी तरह से ये पूरी दुनिया में फैला।

भले ही चुंबन को अक्सर प्यार जताने की भंगिमा की तरह देखा जाता है, लेकिन ऐसा है नहीं. कम से कम पुराने समय में तो ऐसा बिल्कुल नहीं था. मध्यकालीन यूरोप में इसे ग्रीटिंग की तरह देखा जाता, जो हल्के ओहदे वाले लोग ऊंचे ओहदेदारों के साथ करते. दो बराबरी के लोग आपस में मिलते हुए माथे या होठों पर किस करते, जबकि गैर-बराबरी की मुलाकात में केवल नीचे के ओहदे वाला ही ऊपर वाले को चूमता, वो भी हाथ या पैर या फिर कपड़े के किनारे को।

इसके बाद चुंबन का रूप और गहराता गया. ये ज्यादा इंटेन्स हो गया. खासकर होठों पर चुंबन प्यार का प्रतीक बनने लगा. हालांकि फिलहाल किस के जिस स्वरूप पर फ्रांस अपना ठप्पा लगाता है, उसकी शुरुआत किसी फ्रांसीसी जोड़े से हुए होगी, इसपर काफी लट्ठम-लट्ठ हो चुकी. ये बात अलग है कि तगड़ी दावेदारी फ्रांस की ही है।

लगभग एक दशक पहले ही इस देश ने देर तक चुंबन को अपनी डिक्शनरी में शामिल करते हुए उसे एक नाम दिया- गलॉश. साथ में ये दावा भी ठोक दिया कि पहले वर्ल्ड वॉर के समय फ्रांस में समय बिता चुके अमेरिकी सैनिकों ने उनका ये भेद जान लिया और यहां-वहां फैला दिया. बता दें कि पश्चिम के कई मुल्क फ्रेंच किस पर अपनी मुहर लगाना चाहते हैं. कई एंथ्रोपोलॉजिस्ट इसके लिए अलग-अलग तरह के हवाले देते हैं।

मिसाल के तौर पर रोमन शासक टाइबेरिअस ने होठों पर चुंबन पर बैन लगा दिया क्योंकि इससे यौन रोग फैलने का डर रहता था. शासक का राज काफी दूर- दराज तक फैला हुआ था. इजीप्ट से लेकर इटली- जर्मनी और बेल्जियम स्विटजरलैंड का बड़ा हिस्सा उसके कब्जे में था, यानी इन सारे इलाकों में चूमना प्रतिबंधित हो गया. यहीं से गाल चूमने का चलन आया होगा, जो कि अब पश्चिम समेत हमारे यहां भी खूब जोरों पर है. वैसे बैन की बात चल ही निकली है तो बता दें कि 17वीं सदी में जब दुनिया का बड़ा हिस्सा प्लेग से दम तोड़ रहा था, तब भी ब्रिटेन समेत कई देशों ने चूमने पर रोक लगा दी. न मानने वाले को सजा के तौर पर भारी जुर्माना देना होता।

अमेरिका, जो अब अपने खुलेपन और लोकतांत्रिक तौर-तरीकों के लिए जाना जाता है, वहां एक समय ऐसा भी था, जब सार्वजनिक तौर पर किसिंग को शिष्टाचार से बाहर माना गया. ये बात पहले विश्व युद्ध के बाद की है. तब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति केल्विन कूलिज ने इसे बैड मैनर्स की लिस्ट में रखा. इसके बाद शिष्टाचार सिखाने वाली एक लेखिका एमिली पोस्ट ने अपनी मैगजीन में इसे जगह दी।

चुंबन सुनते ही सबके जेहन में कोई न कोई रोमांटिक तस्वीर बनती है, लेकिन ये उतना रोमांटिक है नहीं, जितना हमने मान रखा है. कम से कम दुनिया की 54 प्रतिशत आबादी तो यही सोचती है. अमेरिकी एंथ्रोपोलॉजिस्ट एसोसिएशन ने कुछ साल पहले एक रिसर्च की, जिसमें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के 168 कल्चर्स को शामिल किया गया. इसमें पता लगा कि सिर्फ 46 प्रतिशत लोग ही हैं जो चुंबन को रोमांस से जोड़ते हैं, खासकर होठों पर चुंबन. बाकियों ने चुंबन के इस रूप को रोमांस से जोड़ने से साफ इनकार कर दिया।

दुनिया के कई हिस्से हैं, जहां चुंबन को अब भी खराब माना जाता है, जैसे सोमालिया में इसे बीमारी फैलाने की साजिश की तरह देखते हैं. इसी तरह से बोलिविया का सिरिओनो ट्राइब किसिंग से एकदम अछूता है. हो ये भी सकता है कि शायद एक-दूसरे को पहचानने, या प्रेम जताने के लिए वे आज भी सूंघने जैसी प्राचीन भंगिमा अपनाते हों।

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